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FAQ

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Frequently Asked Questions

प्रश्न 1- उत्तराखण्ड वन विभाग की मुख्य भूमिका क्या है एवं उनके कार्यकलापों में जन सामान्य का क्या योगदान रहता है या रह सकता है ?

उत्तर- उत्तराखण्ड के वनों के वैज्ञानिक प्रबन्धन का इतिहास बहुत पुराना है और यहीं पर वैज्ञानिक वानिकी की शुरुआत हुई थी। सन्‌ श्री डीट्रिच ब्रैन्डिस को भारत का वन महानिरीक्षक नियुक्त किया गया था और तभी से 1865 में वनों का वैज्ञानिक प्रबंधन प्रारम्भ हुआ। ब्रिटिष राज्य के अन्तर्गत वन मूल रूप में राजस्व प्राप्ति के साधन थे किन्तु यह अवश्य है कि अनेक वनाधिकारियों ने संरक्षण का महत्व तब भी समझा था एवं राजस्व प्राप्ति के साथ-साथ वन्य जीव संरक्षण को भी प्राथमिकताओं में शामिल किया गया। आजादी के पश्चात बदलते समय में धीरे-धीरे वनों के प्रबंधन की दिशा में परिवर्तन आया एवं उनके प्रबंधन में वन राजस्व प्राप्ति के बजाय जैव विविधता संरक्षण, मृदा व जल संरक्षण एवं पर्यावरणीय महत्व के संरक्षण को महत्ता दी जाने लगी। इसके अतिरिक्त उत्तराखण्ड के परिप्रेक्ष्य में वनों को ईकोटूरिज्म हेतु भी आवश्यक माना जाता है। संक्षेप में कहें तो राजस्व प्राप्ति हेतु वनों का प्रबंधन पुराना प्रबंधन था एवं नया प्रबंधन संरक्षण मुखी है। उत्तराखण्ड वन बहुल राज्य है एवं इसके कुल भौगौलिक क्षेत्रफल का 65 प्रतिशत भाग वन भूमि है। प्रदेश का लगभग 45 प्रतिशत भाग पेड़ों से आच्छादित है। भारत के अधिकतम राज्यों में वन भूमि व वृक्षाच्छादित क्षेत्रफल का प्रतिशत इससे कहीं कम है। यह न मात्र उत्तराखण्ड के वासियों के लिये गर्व की बात है अपितु यह हम सभी पर एक जिम्मेदारी भी डालती है कि हमारे वन क्षेत्र संरक्षित रहें। इसी कारण वन विभाग उत्तराखण्ड की जनता को भी वनों के प्रबंधन में शामिल करना चाहती है और इस उद्देश्य से वन पंचायत, फौरेस्ट डैवलैपमैन्ट एजैन्सी (FDA) व संयुक्त वन प्रबंधन का सहारा लिया गया। आज वन विभाग प्रदेश की जनता के नजदीक है जैसा की पूर्व में संभवतया नहीं था।

प्रश्न 2-वन विभाग का ढांचा क्या है?

उत्तर- संक्षिप्त में वन विभाग का ढांचा निम्न प्रकार हैः-     विभागीय कर्मचारियों के मूल रूप से 2 कार्यक्षेत्र हैं: (1) वनों के प्रबंधन में सीधे लगे हुये कर्मचारी (Field staff) एवं (2) कार्यालयों का संचालन करने वाले कर्मचारी (Office staff)। वनों के प्रशासन की सबसे छोटी इकाई बीट कहलाती है जो कि एक वन रक्षक के अधीन होती है। कुछ बीटों को मिलाकर एक सैक्शन बनता है एवं कुछ सैक्शन को मिलाकर एक रैंन्ज बनती है। सैक्शन वन दरोगा के अधिकार क्षेत्र में होता है एवं रैन्ज वन क्षेत्राधिकारी के अधीन रहती है। कुछ रैंन्जों को मिलाकर उप वन प्रभाग बनता है जो वन विभाग के प्रान्तीय वन सेवा के अधिकारी के पास होता है। यह अधिकारी सहायक वन संरक्षक/ उप प्रभागीय वनाधिकारी कहलाता है। दो या अधिक उप वन प्रभागों को मिलाकर एक वन प्रभाग बनता है जिसमें भारतीय वन सेवा के उप वन संरक्षक अथवा छोटे वन प्रभागों में प्रान्तीय वन सेवा के अधिकारी प्रभागीय वनाधिकारी का कार्य करते हैं। कुछ वन प्रभागों को मिलाकर एक वृत्त बनता है जो वन संरक्षक स्तर के अधिकारी के पास रहता है एवं कुछ वृत्तों को मिलाकर एक मण्डल बनता है जिसमें मुख्य वन संरक्षक स्तर के अधिकारी होते हैं। विभाग में कुमाऊँ मण्डल, गढ़वाल मण्डल एवं वन्य जीव संरक्षण हेतु प्रमुख वन संरक्षक वन्य जीव राज्य स्तर का कार्य करते हैं। विशेष कार्यों/ योजनाओं के क्रियान्वयन पर नियंत्रण हेतु प्रमुख वन संरक्षक के अधीन अपर प्रमुख वन संरक्षक तथा मुख्य वन संरक्षक है। इन सभी के ऊपर प्रमुख वन संरक्षक है।

प्रश्न 3- वन विकास निगम का कार्य किस प्रकार वन विभाग से भिन्न हैं ?

उत्तर- वन विभाग का संक्षेप में मुख्य कार्य वनों, वन्य जीवों, जड़ी-बूटी, समस्त प्रकार के लघु वन उपज का विकास, सम्वर्द्धन, एवं संरक्षण है, जबकि वन विकास निगम का कार्य प्रकाष्ठ, जड़ी-बूटी एवं समस्त प्रकार के लघु वन उपज का वैज्ञानिक पद्धति से विदोहन कर विक्रय करना है। प्रकाष्ठ के विदोहन हेतु सूखे, आँधी/ तुफान-बर्फ से ढहे/ उक्षड़े एवं कीट ग्रस्त वृक्षों का लौट बनाकर एवं तत्पश्चात उन्हें छाप कर वन विकास निगम को अग्रिम कार्य जैसे कटान, चिरान, विक्रय डिपो तक ढुलान एवं विक्रय हेतु सौंप दिया जाता है। इन डिपुओं पर वन निगम द्वारा प्रकाष्ठ आदि का खुली नीलामी आदि विधि द्वारा विक्रय किया जाता है। वन विकास निगम द्वारा उनको सौंपे गये वन उत्पाद की रौयल्टी वन विभाग को भुगतान की जाती है।

प्रश्न 4- उत्तराखण्ड में कितने वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र हैं ?

उत्तर- वन्य जीव संरक्षित क्षेत्र वह क्षेत्र होता है जो कि वन्य जीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act-1972) के प्राविधानों के तहत सरकार द्वारा संरक्षित क्षेत्र घोषित किये जाते हैं। यह तीन श्रेणियों के होते हैं-(1) राष्ट्रीय उद्यान (National Park), पशु विहार (Wildlife Sanctuary) एवं संरक्षण आरक्षि (Conservation Reserve)। कानूनी तौर पर सबसे अधिक संरक्षण राष्ट्रीय उद्यान को मिलता है। तत्पश्चात पशु विहार एव अंत में संरक्षण आरक्षि को उत्तराखण्ड में 6 राष्ट्रीय उद्यान, 6 पशु विहार और 2 संरक्षण आरक्षि हैं। राष्ट्रीय उद्यान में प्रमुख कार्बेट राष्ट्रीय उद्यान तथा राजाजी राष्ट्रीय उद्यान हैं। हाल ही में 2 संरक्षण आरक्षिति- आसन वैटलैण्ड व झिलमिल झील बनाये गये हैं जो कि भारत के प्रथम संरक्षण आरक्षि हैं।

प्रश्न 5- उत्तराखण्ड राज्य का कितना क्षेत्र संरक्षित क्षेत्र हैं ?

उत्तर- उत्तराखण्ड राज्य का संरक्षित क्षेत्र प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का 13.75%  तथा कुल वन क्षेत्र का 22.22% हैं।

प्रश्न 6- उत्तराखण्ड में पक्षियों की कितनी प्रजातियां पायी जाती हैं ?

उत्तर- उत्तराखण्ड में पक्षियों की लगभग 600 प्रजातियां पायी जाती हैं जो देश में पायी जाने वाली पक्षी प्रजातियों की लगभग 50% हैं।

प्रश्न 7- जैट्रोफा का तेल पौधे के किस भाग से निकाला जाता हैं तथा यह किस काम में आता हैं?

उत्तर- जैटोफा का तेल पौधे के बीज से तैयार किया जाता है ,यह डीजल बनाने के साथ-साथ साबुन बनाने, सौंदर्य प्रसाधन बनाने, तथा मोमबत्ती बनाने के काम आता हैं। प्रदेश में जैट्रोफा के उत्पादन पर वृहद स्तर पर कार्य किया जा रहा हैं।

प्रश्न 8- उत्तराखण्ड के किस जनपद में सबसे अधिक वन क्षेत्र हैं ?

उत्तर- उत्तरकाशी जनपद में सबसे अधिक वन क्षेत्र 7216.615 वर्ग किमी0 है।

प्रश्न 9- उत्तराखण्ड वन विभाग का मुख्यालय कहां हैं ?

उत्तर- उत्तराखण्ड वन विभाग का मुख्यालय 87- राजपुर रोड़ देहरादून में स्थित है।

प्रश्न10- प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव, उत्तराखण्ड का कार्यालय कहां स्थित है ?

उत्तर- प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव,  उत्तराखण्ड का कार्यालय नैनीताल में है तथा शिविर कार्यालय 5 चन्द्रवनी देहरादून में है।

प्रश्न11 - वन भूमि हस्तान्तरण का कार्य कौन देखता है तथा इनका कार्यालय कहां स्थित हैं?

उत्तर- वन विभाग में वन भूमि हस्तान्तरण का कार्य अपर प्रमुख वन संरक्षक भूमि सर्वेंक्षण निदेशालय देखते हैं, इनका कार्यालय इन्दिरानगर कालोनी देहरादून में स्थित है।

प्रश्न12- प्रदेश में सबसे अधिक वन किन प्रजातियों के है ?

उत्तर- प्रदेश में सबसे अधिक वन चीड़- लगभग 4 लाख है0, साल- लगभग 3 लाख है0, तथा बांज- लगभग 3 लाख है0 है।

प्रश्न13- वन विभाग के पास कुल कितनें वन विश्राम भवन है ?

उत्तर- वन विभाग के पास वर्तमान में कुल 300 से अधिक वन विश्राम भवन हैं जिनका आरक्षण स्थानीय प्रभागीय वनाधिकारी के कार्यालय से किया जाता है।

पश्न14- सबसे अधिक पर्यटक किस संरक्षित क्षेत्र में आते हैं ?

उत्तर- सबसे अधिक पर्यटक कार्बेट राष्ट्रीय पार्क में आते हैं। वर्ष 2008-09 में कुल 202649 पर्यटक आये थे जिनमें 8757 विदेशी थे।

प्रश्न15 - उत्तराखण्ड में क्या हक हकूक में प्रकाष्ठ देय हैं ?

उत्तर - माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा वर्तमान में हक हकूक अनुमन्य किया गया है। पूरे प्रदेश हेतु 32.000 घनमीटर प्रकाष्ठ अनुमन्य है।

प्रश्न16- वन्य प्राणियों के द्वारा जानमाल व फसल क्षति के लिये क्या मुआवजा देय हैं ?

उत्तर- वन्य प्राणियों के द्वारा जानमाल व फसल क्षति के लिये मुआवजा देय है। उत्तराखण्ड शासन ने हाल ही में इसकी दरों को लगभग दोगुना कर संशोधित किया है।

प्रश्न17- क्या उत्तराखण्ड वन विभाग प्रकाष्ठ व अन्य वन उपज का विदोहन करता है ?

उत्तर- उत्तराखण्ड के वनों का प्रकाष्ट व अन्य वन उपज का विदोहन उत्तराखण्ड वन विकास निगम के द्वारा किया जाता है जिसका मुख्यालय नरेन्द्रनगर में है तथा शिविर कार्यालय देहरादून में स्थित है।

प्रश्न18- क्या संरक्षित क्षेत्रों मे वन उपज का विदोहन किया जाता हैं ?

उत्तर- संरक्षित क्षेत्रों से वन उपज के विदोहन पर पाबन्दी है।

प्रश्न19- वन विभाग उत्तराखण्ड का वर्ष का राजस्व कितना है ?

उत्तर- वन विभाग उत्तराखण्ड राज्य का राजस्व अर्जित करने वाला एक महत्वपूर्ण विभाग है। वर्ष 2008-09 में रू0 205.78 करोड़ अर्जित किये गये।

प्रश्न20- क्या उत्तराखण्ड वन विभाग के पास अपना कोई वानिकी प्रशिक्षण संस्थान है ?

उत्तर-उत्तराखण्ड वन विभाग का वानिकी प्रशिक्षण अकादमी हल्द्वानी में स्थित है जहां अधिकारियों/ कर्मचारियों के अलावा वन पंचायत तथा संयुक्त वन प्रबन्ध समिति के सदस्यों को भी प्रशिक्षित किया जाता है।


Source : Uttarakhand Forest Government of Uttarakhand, Last Updated on 13-10-2017